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Wednesday, October 20, 2010

दुःख का अहसास


दुःख .........


सायद आप जानना चाहते हैं की दुःख क्या है .......? क्योंकि जिन्दगी हमें कभी कभी ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जब हम दुःख का एहसास करते हैं तब यह सारी कायनात हमें बेरंग नजर आने लगती है हालाँकि हममे से हर कोई इस शब्द और इसके प्रभाव से वाकिफ है क्योंकि यह कई रूपों में हमें मिलते हैं फिर भी दुःख क्या होता है..............? मेरी नजरों में किसी के प्रति अटूट और निश्छल प्रेम का खंडन होना ही हमारे दुखों का कारन होता है कभी आप ऐसा करके देखना तो सायद आप भी दुःख को आप बहुत करीब से देख पाएंगे

कभी किसी को चाहना और चाहते ही रहना दिन भर उसको ही सोचते रहना अपने हाथो की लकीरों में उसके नाम को तरसना और जब कभी वो इन रियाजतो का हिसाब मागने को सामने आये तो आप उसका हाथ थम लेना और अगर वो कुछ कहे तो मुस्कुराकर अनजान बन जाना और जब वो मायूश होकर लौट जाए तो अपने अन्दर झाकना और खुद से पूछना तब तुम्हारा दिल तुम्हे बताएगा की दुःख किसे कहते है और दुःख क्या होता है .................तिलक

Friday, October 8, 2010

बिखरे मोती.....


  1. - हर शख्स को आईना जरूर देखना चाहिए। बदसूरत शख्स को इसलिए ताकि वह अच्छे काम करके अपनी बदसूरती को कम कर सके और खूबसूरत शख्स को इसलिए, ताकि वह अच्छे काम करके अपनी खूबसूरती को बनाए रख सके।
  2. - हर शख्स को शादी जरूर करनी चाहिए। अगर अच्छी पत्नी मिल जाए तो जिंदगी संवर जाती है और अगर खराब पत्नी मिलती है तो इंसान दार्शनिक बन जाता है।
  3. - किसी को दोस्त बनाने में थोड़ा वक्त लें लेकिन एक बार दोस्ती करने के बाद हमेशा के लिए मजबूती से उसका हाथ थामे रखें।
  4. - दूसरों की सीख और लेखों से अपनी जिंदगी को संवारें ताकि आप आसानी से वह पा सकें, जिसे पाने के लिए दूसरों ने कड़ी मेहनत की।
  5. - आप जैसा दिखना चाहते हैं, उसके लिए कड़ी मेहनत करें। तभी प्रतिष्ठा मिलेगी।
  6. - हर ईमानदार शख्स मन से हमेशा बच्चा होता है।
  7. - अपशब्द न सिर्फ खुद में खराब होते हैं, बल्कि वे आत्मा को भी छलनी करते हैं।
  8. - जो सबसे कम में संतुष्ट है, वही असल में धनी है क्योंकि संतुष्टि ही कुदरत की दौलत है।
  9. - सिर्फ जीना मायने नहीं रखता, बल्कि सही तरीके से जीना मायने रखता है।
  10. - ऐसी जिंदगी बेमानी है, जिसे इम्तिहान का सामना नहीं करना पड़ा हो।
  11. - असली समझ तभी पैदा होती है, जब हम जान जाते हैं कि हम जिंदगी के बारे में, खुद अपने बारे में और अपने आसपास की दुनिया के बारे में कितना कम जानते हैं।
  12. - यह जानना ही असली ज्ञान और समझदारी है कि आप कुछ नहीं जानते हैं।
  13. - मैं जानता हूं कि मैं बुद्धिमान हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि मैं कुछ नहीं जानता।
  14. - हमारी प्रार्थनाएं किसी खास चीज को हासिल करने के लिए नहीं होनी चाहिए क्योंकि भगवान बेहतर जानता है कि हमारे लिए क्या अच्छा है।
  15. - अगर सभी दुखों का ढेर लगा दिया जाए और हर किसी को उसमें से अपना हिस्सा लेने को कहा जाए तो ज्यादातर लोग उसमें से भी अपना हिस्सा लेने के लिए दावा करेंगे और हिस्सा लेकर चुपचाप अलग भी हो जाएंगे।
  16. - जहां इज्जत है, वहां डर है। लेकिन जहां डर है, वहां हमेशा इज्जत भी हो, ऐसा जरूरी नहीं है।
  17. - बेकार लोग सिर्फ खाने-पीने के लिए जिंदा रहते हैं, जबकि काबिल लोग जिंदा रहने के लिए खाते-पीते हैं।
  18. - महिला को अगर पुरुष की बराबरी मिल जाए तो वह पुरुष से बेहतर साबित होती है।
  19. - तीव्र इच्छाएं अक्सर जानलेवा नफरत पैदा करती हैं।

Saturday, October 2, 2010

जिन्दगी का सफ़र.....


कहते है यहाँ साब मोह का बंधन है, मोह मे मत pado ,सब माया है और भी बहुत कुछ...............

मगर सोचने की बात ये है की क्या कोई इंसान बीना मोह, माया, साथी, माँ-बाप, भाई-बाहें, रिश्ते-नाते ,प्यार , समाज इन के बीना रह सकता है लोग इश सच को जानते है की सब छोड़ कर जाना है फीर भी जिन्दगी को जीते है माया और मोह मे पड़ कर ही सहीमगर कुछ लोग ऐसे भी होते है तीलक जीनको जिन्दगी मीलती तो है मगेर बीना कीशी हमसफ़र के , बीना कीसी साथी के, उसका कोई नहीं होता , लोग कहते है की जीसका कोई नहीं होता उसका खुदा होता है . अगर खुदा होता है तो क्यों नहीं आता उसके पास , क्यों नहीं उससे बाते करता है, क्यों नहीं उसके दुःख दर्द को बाट लेता है. उसको तनहा क्यों होने देता है .जीसका कोई नहीं होता उसकी कोई मंजील भी नहीं होती , उसको हर रास्ता बेकार नजर आता है.वो जिन्दगी जीता तो है मगेर कीशी उल्लाश और उमंग बगैर ,आप सोचो उष ज़िन्दगी को जीना कितना मुस्किल होता है. वो इंसाने जीता है किसके सहारे सिर्फ एक उम्मीद सहारे की सायद कल साब ठीक हो जायेगा , कोई सूरज मेरी जिन्दगी मे भी रोसन हो जाये जब की उसको उसकी कोई कीरण भी दूर तक नज़र नहीं आती फीर भी जीता है जीता ही चला जाता हैकोई उम्मीद की कीरण नजर आती भी है तो लपक कर उसको पकड़ना चाहता है,magar उसकी किस्मत मे ख़ुशी कहा , वो कीरण भी उससे आँख बचा केर नीकल जाती है.
एक बार वो इन्सान फीर नीरास हो जाता है फीर अपने दील को सम्हालता है और फीर कोई रोशनी जाये सायद की उम्मीद से जीने लगता है जब ज्यादा ही नीरास होता है तो सोचता है कोई बात नहीं तीलक कभी तो अकेले जाने के दीन पुरे होगे कभी तो इश जिन्दगी का सफ़र पूरा होगा चले चलो सायद तुम्हे अकेले ही जिन्दगी की मंजिल तय करनी थी
तुम्हारी किस्मत यही है की तू आया भी अकेला ,जीएगा भी आकेला और जायेगा भी आकेला...

Friday, April 2, 2010

सबका मालिक एक


Shri Sai Ram param satya, prakaash roop,

parama paavana Shirdi nivaashi, parama gnyaan aanand
swaroop, pragnyaa pradaataa, satchidananda swaroop,

parama purush yogiraaj, dayaalu devaadhideva hein,
unko baar baar, namaskaar, namaskaar, namaskaar |



Sweekaar karo meri vandanaa, shirdi ke kartaar|
Sai tujhe paramaatman, mangal shiv shubhkaar||

Haath jodkar hein khadaa, sevak tere dwaar |
kartaa nish din vandanaa, Sai karo sweekaar ||

Charanon par mastak kiye, vinay bhakti ke saath |
namaskaar mera tujhe, hove jag ke naath ||

Sai naam jap vandanaa, yahi saadhanaa yog |
jag jhoothaa aur jagath ke, mithyaa hein sab bhog ||

Namo namo hey Sai prabhu, tum ho jag ke naath |
sabke paalanhaar tum, charan navaavun maath ||

Donon kar ko jodh kar, mastak ghutne take |
tujh ko ho pranaam mama, shath shath koti anek ||

Tan se seva Sai ki, man se sumiran naam |
dhan se dhruti dhaarnaa, karma karo nishkaam ||

Bhakti bhaav shubh bhaavanaa, man me bhar bharpoor |
shradhdha se tujh ko namoon, mere Sai hajoor ||




===Om Sai Shri Sai Jaya Jaya Sai ===